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लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी: देश के लिए बलिदान देने वाला अयोध्या का वीर सपूत
लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी: देश के लिए बलिदान देने वाला अयोध्या का वीर सपूत
भारतीय सेना का हर जवान देश की रक्षा के लिए हर समय तैयार रहता है। कुछ सैनिक ऐसे भी होते हैं जो अपने साहस और कर्तव्यनिष्ठा से अमर हो जाते हैं। ऐसा ही एक नाम है लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी का, जिन्होंने सिक्किम में अपने अग्निवीर साथी की जान बचाते हुए वीरगति प्राप्त की। यह घटना न केवल उनकी वीरता की मिसाल है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि भारतीय सेना के जवानों के लिए "पहले साथी, फिर स्वयं" की भावना कितनी गहराई से जुड़ी होती है।
घटना का विवरण
घटना सिक्किम राज्य के एक दुर्गम क्षेत्र की है, जहाँ सेना के जवान गश्त पर थे। इस दौरान तेज़ बहाव वाली एक नदी को पार करते समय एक अग्निवीर स्टीफन सुब्बा का पैर फिसल गया और वह धारा में बहने लगे। जैसे ही यह देखा गया, लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी बिना एक पल गंवाए नदी में कूद गए। उन्होंने अपने साथी को बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन दुर्भाग्यवश वह खुद भी धारा में बह गए और शहीद हो गए।
शशांक तिवारी का जीवन परिचय
लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले के रहने वाले थे। वह शुरू से ही मेधावी छात्र रहे। उन्होंने पहले ही प्रयास में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) की परीक्षा पास कर सेना में अधिकारी बनने का सपना साकार किया। उनके पिता सरकारी सेवा में थे और परिवार में देशभक्ति की भावना शुरू से ही रही। उनके मित्रों और शिक्षकों का कहना है कि शशांक शुरू से ही जिम्मेदार, संवेदनशील और अनुशासित थे।
परिवार पर असर
उनकी शहादत की खबर जैसे ही अयोध्या पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। माता-पिता को यह विश्वास नहीं हो पा रहा था कि उनका बेटा अब नहीं रहा। विशेष बात यह है कि उनकी मां पहले से ही हृदय रोग से पीड़ित हैं, इसीलिए परिवार ने शुरू में यह खबर उनसे छिपाए रखी। गाँव और जिले के लोग उनके घर पहुंचकर श्रद्धांजलि दे रहे हैं। हर किसी की आंखों में आंसू और दिल में गर्व का भाव है।
सेना और देश का गर्व
भारतीय सेना ने लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी की बहादुरी को सलाम किया है। उनकी शहादत को सेना की सर्वोच्च परंपराओं के अनुरूप बताया गया है। इस प्रकार के जवान सेना को गौरवान्वित करते हैं और देश के नागरिकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ते हैं।
समाज और युवाओं के लिए प्रेरणा
लेफ्टिनेंट तिवारी की यह बलिदानी कहानी न केवल सेना में सेवा देने वालों के लिए, बल्कि देश के हर युवा के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि देशसेवा का मार्ग कभी आसान नहीं होता, लेकिन यह सबसे महान होता है। शशांक तिवारी जैसे योद्धा हमें यह भी बताते हैं कि एक सच्चा सैनिक सिर्फ युद्ध के मैदान में ही नहीं, बल्कि हर परिस्थिति में वीरता दिखाता है।
निष्कर्ष
लेफ्टिनेंट शशांक तिवारी की शहादत ने पूरे देश को भावुक कर दिया है। उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। वे सिर्फ एक सैनिक नहीं, बल्कि एक आदर्श थे - जो हर भारतीय के हृदय में बस गए हैं। हम सबका कर्तव्य है कि हम उनके बलिदान को व्यर्थ न जाने दें और राष्ट्रनिर्माण में अपनी भूमिका निभाएं।
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